Monday, September 24, 2012

मुख्यमंत्री और अधिकार रैली

मुख्यमंत्री के आगमन से प्रस्थान तक  अधिकार  रैली पूरी तरह मिथिला के रंग में रंग हुआ था जिसमे मुख्यतः स्वागत गीत ( मैथिलि में ) ,  मधुबनी पेंटिंग , शाल , और  पाग  जो की मिथिला की पहचान है आकर्षण का केंद्र रहा ! मुख्यमंत्री ने भी मिथिला के सम्मान को सहृदय सराहा 
पेश है कुछ झलकियाँ -  अधिकार 






                                                          सभी फोटो हिंदुस्तान से साभार




Saturday, September 22, 2012

रोचक जानकारियां




आपका स्वागत है 

 
एक मई और एक तू



                                                        धक्के से चालू होता है ये रेल 

नेपाल से पानी  खरीद  कर सिचाई की गयी
 

विद्यापति

विद्यापति भारतीय साहित्य की भक्ति परंपरा के प्रमुख स्तंभों मे से एक और मैथिली के सर्वोपरि कवि के रूप में जाने जाते हैं।
इनके काव्यों में मध्यकालीन मैथिली भाषा के स्वरुप का दर्शन किया जा सकता है। इन्हें वैष्णव और शैव भक्ति के सेतु के रुप में भी स्वीकार किया गया है। मिथिला के लोगों को 'देसिल बयना सब जन मिट्ठा' का सूत्र दे कर इन्होंने उत्तरी-बिहार में लोकभाषा की जनचेतना को जीवित करने का महती प्रयास किया है। मिथिलांचल के लोकव्यवहार में प्रयोग किये जानेवाले गीतों में आज भी विद्यापति की श्रृंगार और भक्ति रस में पगी रचनायें जीवित हैं। पदावली और कीर्तिलता इनकी अमर रचनायें हैं।
महाकवि विद्यापति संस्कृत, अबहट्ठ, मैथिली आदि अनेक भाषाओं के प्रकाण्ड पंडित थे। शास्र और लोक दोनों ही संसार में उनका असाधारण अधिकार था। कर्मकाण्ड हो या धर्म, दर्शन हो या न्याय, सौन्दर्य शास्र हो या भक्ति रचना, विरह व्यथा हो या अभिसार, राजा का कृतित्व गान हो या सामान्य जनता के लिए गया में पिण्डदान, सभी क्षेत्रों में विद्यापति अपनी कालजयी रचनाओं के बदौलत जाने जाते हैं। महाकवि ओईनवार राजवंश के अनेक राजाओं के शासनकाल में विराजमान रहकर अपने वैदुश्य एवं दूरदर्शिता सो उनका मार्गदर्शन करते रहे। जिन राजाओं ने महाकवि को अपने यहाँ सम्मान के साथ रखा उनमें प्रमुख है:
(क) देवसिंह
(ख) कीर्तिसिंह
(ग) शिवसिंह
(घ) पद्मसिंह
(च) नरसिंह
(छ) धीरसिंह
(ज) भैरवसिंह और
(झ) चन्द्रसिंह।
इसके अलावे महाकवि को इसी राजवंश की तीन रानियों का भी सलाहकार रहने का सौभाग्य प्राप्त था। ये रानियाँ है:
(क) लखिमादेवी (देई)
(ख) विश्वासदेवी और
(ग) धीरमतिदेवी।

यह हमारे संस्कृति की भी पहचान है ! इसे आमलोगों तक सरल भाषा में पहुचने की पहल की जा रही है !

विद्यापति द्वारा लिखित देवी गीत 
जय जय भैरवि असुर-भयाउनि, पशुपति भामिनी माया।
सहज सुमति वर दिअ हे गोसाऊनि, अनुगति गति तुअ पाया।।

वासर रैन सवासन शोभित, चरण चन्द्रमणि चूडा।
कतओक दैत्य मारि मुख मेलल, कतओ उगलि कय कूडा।।

साँवर वरन नयन अनुरंजित, जलद जोग फूल कोका।
कट-कट विकट ओठ पुट पांडरि, लिधुर फेन उठि फोका।।

घन-घन घनन घुँघरू कत बाजय, हन-हन कर तुअ काता।
विद्यापति कवि तुअ पद सेवक, पुत्र बिसरू जनु माता।।

कुञ्ज बिहारी मिश्र

की सर झुकाने को जी करता है धन्य है मिथिला आप जैसे कलाकारों को पाकर 
मृत कलाकारों के परिवार के सहयोग के लेल समस्त कला जगत के हाथ बैढ़ रहिल छथि 
इ हमरा सब के लेल एक टा प्रेरणा आ गर्व वाला बात थिक 


कुञ्ज बिहारी मिश्र हमारे मिथिला के सुविख्यात और सुप्रतिष्ठित गायक है इन्होने शाश्त्रीय संगीत के साथ साथ मिथिला के लोकगीतों  का भी गहन अध्ययन किया है!








Friday, September 21, 2012

गणेश पूजा मधुबनी

supar abrar band

shiv jee

ganpati bappa

jan samuh at subhash chowk in ganpati visarjan


साभार -  प्रिन्स राज



साभार शन्नी कुमार
श्री  श्री  १०८  गणेश  पूजा  समिति  के  द्वारा  विगत  १९८७  से  लोहापत्ति  मधुबनी  में  बारे  ही  धूम  धाम  से  पूजा  अर्चना  की  जाती  रही  है  जिसमे  प्रमुख  आकर्षण  का  केंद्र  गणपति  की  विशाल  प्रतिमा  के  साथ  साथ  साज  सज्जा  और  decoration  रहता  है


appan madhubani
अप्पन मधुबनी में आपका स्वागत है यहाँ आपको मधुबनी के बारे में नयी और अनोखी  जानकारी मिलती रहेगी, यही हमारी कोशिश है!
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फोटो गैलेरी 


  • मधुबनी की विशेषताएं 
  1.  मधुबनी चित्रकला    
  2. वाचस्पति मिश्र 
  3. मंडन मिश्र  
  4. विद्यापति