अभी सुबह हुई नहीं है .
अभी अभी घोर अंधियारे को
चिर के एक आभा फैली है .
पर लगता है अभी सुबह हुई नहीं है .
अभी निशाचर मौजूद हैं शाखाओं पर
और झाडियों के पीछे घात लगाये .
निडर पथिक चल पड़ा है मंजिलों को
पर लगता है अभी सुबह हुई नहीं है .
कहीं दूर अभी भी गिदरों की भभकी गूंज रही है .
और टीले पर गिद्ध भी मंडरा रहा है .
अब इस अडिग पथिक को कौन बताये
की सुबह अभी हुई नहीं है .
चाँद भी अब चांदनी को समेट रहा है .
तारा भी आवरण को लपेट रहा है .
सियार अभी भी राह पथिक की देख रहा है .
क्या वाकई अभी सुबह हुई नहीं है .
चमगादरों की फरफराहट
झींगुरों की झुनझुनाहट
नदी किनारे के बरगद से आ रही है .
अब मान भी जाओ पथिक की सुबह हुई नहीं है .
चिर के एक आभा फैली है .
पर लगता है अभी सुबह हुई नहीं है .
अभी निशाचर मौजूद हैं शाखाओं पर
और झाडियों के पीछे घात लगाये .
निडर पथिक चल पड़ा है मंजिलों को
पर लगता है अभी सुबह हुई नहीं है .
कहीं दूर अभी भी गिदरों की भभकी गूंज रही है .
और टीले पर गिद्ध भी मंडरा रहा है .
अब इस अडिग पथिक को कौन बताये
की सुबह अभी हुई नहीं है .
चाँद भी अब चांदनी को समेट रहा है .
तारा भी आवरण को लपेट रहा है .
सियार अभी भी राह पथिक की देख रहा है .
क्या वाकई अभी सुबह हुई नहीं है .
चमगादरों की फरफराहट
झींगुरों की झुनझुनाहट
नदी किनारे के बरगद से आ रही है .
अब मान भी जाओ पथिक की सुबह हुई नहीं है .
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